27 फरवरी, 2021

जो जियें ही दूसरों के लिए पहले

वो क्या डरें मौत के खबरनामो से..

जिनको खरीद ना सके कोई दौलत से

वो क्या बिकेंगे हीरों की खानों से..

अगर इतना है, अहंकार मन में

ज़रा खरीद के दिखाओ

प्यार बड़ी बड़ी दुकानों से...! ~ मंदीप

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3 नवम्बर, 2020

गुलाब सी रूह को गुलाब की तरह रखें। आत्मा को बेशुमार प्यार करें। गुलाब, गुलाब ही रहते हैं, फिर चाहे वो ख़ुशी का वक़्त हो या मौत का वक़्त। वह अपनी खुशबू नहीं छोड़ता, हमेशा हर मौके पर एक जैसा रहता है, अपने खूबसूरत अहसास को नहीं छोड़ता। रूह सभी दुखों और सुखों को सहन करती है, लेकिन रूह को गुलाब की तरह खिलते रहना चाहिए। ऐसी निस्वार्थ खुशबू के मालिक बनें तांकि जो आपके साथ हैं, उनका दुःख भी कम होता जाए और खुशियाँ बढ़ें। अपने सुख-दुख के बारे में इतने स्वार्थी ना बनें, कि आपकी रूह की महक, आत्मा की सुगंध, रूह का सकून किसी तक न पहुंचे। आप गुलाब की तरह हैं चाहे कोई भी वक़्त हो, भले ही कांटो से घिरा हो, धैर्य के बल पर आप सब बेशुमार प्यार, नम्रता, विनम्रता की खुश्बु फैलाते रहो। गुलाब बनों। - मनदीप

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2 नवम्बर, 2020

“ऐसी महिला बनो जो जीवन भर पढ़ना और सीखना कभी ना छोड़े। पैसे के लिए अपने पिता, पति, भाई पर निर्भर न होना पड़े, बल्कि खुद नौकरी या कारोबार करके अपने परिवार के साथ-साथ दूसरों की भी आर्थिक मदद करें। कभी भी किसी अनजान का पैसा उपयोग करके खुद को मत झुकाए।”

"ऐसी महिला बनो जो अपनी क्षमताओं में विश्वास करती है, न कि अपनी सुंदरता में। जो अपनी पढ़ाई, अपने हुनर ​​का सम्मान करती है और लगातार उन्हें निखारती संवारती हैं। कपड़े, गहनों से नहीं, गुणों से भरपूर बनो।

"ऐसी महिला बनें जो दयालुता से भरी हो और जीवन जीने की इच्छा रखती हो" वह जो दुनिया को सच में बेहतर स्थान बनाने की ताकत रखती हो, अधिक शांतिपूर्ण और अधिक विनम्र। अत्यंत मेहनती बनो, साहसी बनो, मददगार बनो, और खुशी से जीवन व्यतीत करो, खुशियाँ बांटो। आप एक महिला हैं, इसे स्वीकार करें और खुद पर गर्व करें। ख़ुदा का शुक्र करो। - मनदीप

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30 अक्टूबर, 2020

माफ़ करना खुद की रूह को सकून देने जैसा है। मैंने जीवन में हर तरह के व्यक्ति को माफ़ किया है। जिसने आत्मा को परेशान किया हो, जिसने बुराई की हो, जिसने धोखा दिया हो, जिसने अन्याय किया है, क्योंकि दूसरों को चिढ़ाना उसका संस्कार है और क्षमा करना हमारा। जिसकी सोच-समझ छोटी हो, जिसका दायरा ही सीमित हो उसके साथ गिला-शिकवा किस बात का? ऐसे व्यक्ति की मानसिकता पे रहम करें। सच्चे दिल से प्रार्थना करें कि भगवान उसे समझ दें। हर दिन बड़ी से बड़ी गलती को भी माफ़ करने का अभ्यास करें। खुश रहें।

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29 अक्टूबर, 2020

मेरे माता-पिता की बेटी के रूप में, मेरी क़ाबलियत में अटूट विश्वास ने मुझे आज लाखों लोगों के दिलों तक पहुंचाया है। जो माता-पिता अपनी बेटियों पर विश्वास करते हैं, वो उनकी शादी के बजाए उनकी पढ़ाई में ज्यादा ध्यान देते हैं। बेटियाँ तो वैसे ही बहुत खूबसूरत होती है इसलिए उन्हें गहने पहनाने की बजाए, उन्हें खुद के पैरों पर खड़े होकर कमाने के लिए प्रेरित करें। रोने वाली नहीं, जवाबदेह बनाए। ऐसे भटकते समाज में बेटी बहुत से लोगों का सामना करती है, लोगों की दुर्भावना, छूने की लालसा, पैसे के जाल में फंसने की भद्दी चाल, उसके दर्द को सुनने का नाटक, उसके हाव-भाव, बेटी के साथ धोखा, इन सब को बेटी की गलती का नाम मत दीजिएगा। कई हजार पल बेटी अपने अंदर दफनाकर अपने परिवार को प्यार करती हैं, अपनी आज़ादी बनाए रखने की कोशिश करती है। हर महिला यह बात अंदर से जानती है कि महिला का जीवन कितना कठिनाईओं भरा होता हैं! बेटियों का समर्थन करें, उनकी गलतियों को माफ़ करें, उनके पंख बनें।

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27 अक्टूबर, 2020

'मेहनत' को 'किस्मत’ कहने वाले लोग यूँ ही मिल जाएंगे, स्वार्थी होंगे। जो लोग आपकी सफ़लता के पीछे आपकी कड़ी मेहनत को देखते हैं वह साधारण नहीं हैं, न ही स्वार्थी। ऐसे दोस्त जो आपकी कड़ी मेहनत की क़दर करते हैं, अगर वो ज़िन्दगी में हैं, तो उसे 'किस्मत' कहा जा सकता है। उन लोगों की इज़्ज़त करें, उनका सम्मान करें जो आपको होंसला देते हैं, प्रोत्साहित करते है। कदम कदम पे आपको प्रेम करने वाले अनगिनत लोग है, मैं अपनी ज़िन्दगी में ये महसूस करती हूँ। कई बार जब मैं सोचती हूँ कि मुझे ढेर सारा प्यार, सराहना करने वालों के लिए क्या कर सकती हूँ? तो मेरे लिए यह अकेले सोचना और इसका हल निकालना असंभव सा लगता है परन्तु वो कहते है न कि हर सवाल का जवाब और हर समस्या का हल 'गुरबाणी' प्रदान कर देती है। जवाब था, "सरबत दा भला" अर्थात सबकी भलाई के लिए परमात्मा से प्राथना करें। ज़िन्दगी में आए हर उस इंसान का उतना शुक्रिया करना शायद मुश्किल हो जितना वो हमे प्यार करता हैं , पर सच्चे दिल से, रूह की गहराई से "सरबत दा भला" माँगते रहना ही इसका उत्तम एंव श्रेष्ट हल हैं।

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17 अक्टूबर, 2020

लॉकडाउन में सब कुछ बंद होने के साथ ही शिक्षा के संस्थान भी बंद हुए जिसके के कारण हर वर्ग, हर उम्र के विद्यार्थी को इस समस्या का सामना करना पड़ा मगर यहाँ पर सबसे ज़्यादा दिक्कत विशिष्ट बालकों को हुई हैं जो पहले से ही अपनी कमज़ोरियों को ताक़त बना के आगे बढ़ते हैं, आम बच्चों की तरह शिक्षा ग्रहण करने की कोशिश करते है परन्तु वशिष्ट बालकों को पढ़ने लिखने के लिए उत्तम गुरु की ज़रूरत होती है! शिक्षक और विद्यार्थी का आपस में ताल मेल रहना बहुत आवश्यक होता हैं, वजह यही हैं कि जो बालक देख नहीं सकते, सुन नहीं सकते या बोल नहीं सकते! वह घर में बैठे 'ऑनलाइन क्लास' कैसे लगा सकते हैं? भारत में पहले से ही वशिष्ट बालकों के आंकड़ों में से सिर्फ एक चौथाई हिस्सा ही शिक्षा ग्रहण कर रहा हैं जो कि देश के उज्जवल भविष्य के विरुद्ध हैं। सबको शिक्षा का अधिकार हैं और हर माँ बाप को अपने बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने में सहायता करनी चाहिए बजाए की उनकी समस्याओ को उनकी कमज़ोरी बनाना। वशिष्ट बालक बहुत नादान होते है बल्कि साधारण बच्चों से ज्यादा मासूम होते है, और रही बात ऑनलाइन पढ़ाई की तो जिस तरह नवमीं से बारहवीं तक के बच्चों के लिए स्कूल खोले गए है इसी तरह वशिष्ट बालकों को स्कूलों में पढ़ाई करने की सुविधा प्राप्त कराई जाएं तांकि वह अपने अध्यापक के सम्पर्क में रहकर अच्छे ढंग से शिक्षा को ग्रहण कर सकें।

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17 अक्टूबर, 2020

इस दुनिया का सामना करना है तो ईमानदारी के शिखर पे रहें। संस्कार और शिक्षा के महत्व को समझें। काम को बड़ा-छोटा मत समझें। अपने माता-पिता से ऊपर किसी को भी दर्जा न दे। जीवन में अलग पाने के लिए, अलग रास्ते चुनें। समझें कि मैं खामियों से भरा हूं, आलोचना कभी चोट नहीं पहुंचाएगी।

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16 अक्टूबर, 2020

बेटियाँ बहुत प्यारी होती हैं। बेटी होना किसी आशीर्वाद से कम नहीं, भग्यशाली घरों में जन्म होता है बेटियों का। बेटियों पर विश्वास करें, वे दुनिया के सामने एक मिसाल कायम करने की लगन रखती हैं। उन्हें हमेशा प्यार और सम्मान के साथ आशीर्वाद दें। बेटियों की सफलता में माता-पिता का सबसे बड़ा योगदान होता है। मेरे माता-पिता का मुझ पर भरोसा शायद मेरे जीवन का सबसे खूबसूरत तोहफ़ा है। माता-पिता ने हमेशा सही दिशा में जाने के लिए प्रेरित किया। मुझे अच्छी शिक्षा प्रदान करवा के खुले आसमां में उड़ने की आज़ादी दी। माता-पिता का सिर पर रखा हुआ दुआओं भरा हाथ ही शायद बेटियों की मुस्कान को बनाए रखता है। जिन लोगों को अपनी बेटियों की क्षमताओं पर पूरा भरोसा है, मैं हमेशा उन माता-पिता की सोच को दिल से स्लाम करती हूं।

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15 अक्टूबर, 2020

जीवन एक बहुत ख़ूबसूरत तोहफ़ा है, उसके लिए जिसने अत्यंत पीड़ा में जीना सीख लिया है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दिमाग कितने बोझ नीचे दबा है, दिल कितना सहमा हुआ है। हर हालत में, मुस्कुराहट हमारी असली ताकत, बल, शक्ति और दूसरों के लिए प्रोत्साहन, प्रेरणा, साहस है। धीरज के बहुत इम्तिहान होंगे, धीरज एक कमजोरी नहीं बल्कि एक ताकत है, क्योंकि रोना, खोना, जीवन समाप्त करना धीरज से आसान है। ज़िन्दगी में आने वाली मुश्किलों का डट के सामना करें। ईश्वर प्रदत्त आत्मा, शरीर की क़दर करें। खुद से बहुत प्यार करें, कड़ी मेहनत करें, अपना ख्याल रखें। भावुक हो के किसी को अपनी ज़िन्दगी की चाबी ना दें। यह एक जीवन है, दिल की सुनो, हम इंसान हैं, बेजान कठपुतलियाँ नहीं।

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15 अक्टूबर, 2020

जीवन एक बहुत ख़ूबसूरत तोहफ़ा है, उसके लिए जिसने अत्यंत पीड़ा में जीना सीख लिया है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दिमाग कितने बोझ नीचे दबा है, दिल कितना सहमा हुआ है। हर हालत में, मुस्कुराहट हमारी असली ताकत, बल, शक्ति और दूसरों के लिए प्रोत्साहन, प्रेरणा, साहस है। धीरज के बहुत इम्तिहान होंगे, धीरज एक कमजोरी नहीं बल्कि एक ताकत है, क्योंकि रोना, खोना, जीवन समाप्त करना धीरज से आसान है। ज़िन्दगी में आने वाली मुश्किलों का डट के सामना करें। ईश्वर प्रदत्त आत्मा, शरीर की क़दर करें। खुद से बहुत प्यार करें, कड़ी मेहनत करें, अपना ख्याल रखें। भावुक हो के किसी को अपनी ज़िन्दगी की चाबी ना दें। यह एक जीवन है, दिल की सुनो, हम इंसान हैं, बेजान कठपुतलियाँ नहीं।

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14 अक्टूबर, 2020

जब आप अपने पैरों के बल हो जाते हो, तो दुनिया आपके सफ़र को, आपके जीवन को बहुत आसान समझती है। लेकिन किसी भी सफल व्यक्ति की सफल मुस्कान के पीछे ज़िंदादिल पल होते हैं। क़िस्मत भी केवल उन लोगों का साथ देती है जो कड़ी मेहनत करते हैं। धन की प्रगति तो हर कोई कर सकता है लेकिन हमें यह समझने की ज़रूरत है कि असलीयत में प्रगति खुशी और मन की शांति में है। मन की वास्तविक शांति के लिए निस्वार्थ होने का अभ्यास करें।

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9 अक्टूबर, 2020

मेहनत को सलाम! मेरे गाँव से एक बेमिसाल प्रेरणा! मुझे उच्च पढ़ाई करने, नौकरी करने, अमेरिका में रहने का मौका मिला, लेकिन मैंने अपने ही गाँव में रहकर व्यवसाय स्थापित करने का सोचा और आज वो कर भी रही हूँ। चलिए, मेरे गाँव के "जोबन" से मिलते हैं - उनके पास कोई कंप्यूटर विज्ञान पृष्ठभूमि नहीं है, हालाँकि आज एक शानदार कोडर है। उन्होंने नवीनतम तकनीकों में सॉफ्टवेयर सीखने और अपने अंग्रेजी भाषा में सुधार करने के लिए, दिन-रात काम किया है। चार साल पहले, मेरी कंपनी में पहले साल, वह प्रति माह 10,000 रुपये से कम कमा रहा था, लेकिन आज उसने अपनी योग्यता में इतना सुधार कर लिया हैं कि उसके लिए अपने वेतन का छह गुना सैलरी साबित करना आसान सी बात है और आने वाले वर्षों में निश्चित रूप से दस गुना। वह एक शानदार विजेता बन गया है, एक बहुत मेहनती टीम का साथी, वर्तमान में अमेरिका-आधारित कई परियोजनाओं को संभाल रहा है और वह हमारे ग्राहकों का पसंदीदा है। ऐसे लोग अपने गाँव छोड़कर विदेश में क्यों बसेंगे?

मैं अपनी कम्पनी में ऐसी दिल को छू जाने वाली उदाहरणों को ही अपनी उपलब्धि मानती हूँ। मेरे लिए, सफलता कभी भी भवन, धन, विलासिता और प्रसिद्धि नहीं हैं। मेरी सफलता में निहित है कि मेरे गाँव की जड़ों से कितने लोग योग्य हैं, ताकि मैं उन्हें दुनिया के किसी भी कोने में बैठे अपने ग्राहकों के पसंदीदा या प्रशिक्षित करने और बेहतरीन डेवलपर बना सकूँ। जीवन एक आशीर्वाद है - मैं और जोबन पंजाब के एक ही गाँव टांगरा से हैं- मुझे उनकी मेहनत, समर्पण और अधिक से अधिक सीखने की उनकी उत्सुकता पर गर्व महसूस होता है! वह एक रत्न है! वह मेरी दृष्टि का प्रतिबिंब है।

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8 अक्टूबर, 2020

यह कहानी नहीं एक बेहतरीन मिसाल हैं !! गांवों में प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि अवसरों की कमी है। मुझे नहीं पता कि ऐसी कितनी बेटियाँ होंगी जिनकी कौशल और योग्यता इसी वजह से दब चुकी होगी और आज भी दब रही होगी। मुझे अपने गाँव टांगरा में स्थापित किये हुए IT व्यवसाय को देखकर तब बहुत खुशी होती हैं जब मैं अपने ही गाँव की युवा पीढ़ी को अपने कार्यालय में कड़ी मेहनत करते देखती हूँ। अक्सर मैं सभी को अपने गाँव के बच्चों की प्रतिभा के बारे में बताती हूँ। जतिंदर कौर भी मेरे गाँव टांगरा से ही है, जो कड़ी मेहनत और प्रतिभा का एक उदाहरण है। BCA की डिग्री पूरी करने के बाद, जतिंदर ने इंटरव्यू पास किया और हमारी IT कंपनी SimbaQuartz का हिस्सा बने। कंपनी के वरिष्ठ इंजीनियरों से लगातार प्रशिक्षण के बाद, आज जतिंदर कंपनी के एक बहुत ही महत्वपूर्ण टीम के सदस्य हैं। जतिंदर कई गाँव की बेटियों के लिए एक उदाहरण है जो घर बैठे कुछ भी करने के लिए अपने जीवन से खूब शिकायतें करते हैं। जब जतिंदर चार साल की थे, तब उनके पिता इस दुनिया में नहीं रहे। उनकी माँ की कड़ी मेहनत को सलाम जिन्होंने एक माँ और साथ ही एक पिता के कर्तव्यों को निभाया। उन्होंने सिलाई की और अपनी बेटी को कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करवाई । जतिंदर उनकी मेहनत और विश्वास का मूल्य कभी नहीं चुका सकते। उन्हें सीखने का शौक है और उन्होंने ई-कॉमर्स वेबसाइट और ग्राफिक डिजाइनिंग की कला में महारत हासिल की है। आज, जतिंदर ने संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में हर देश के लिए वेबसाइटें बनाई हैं। जतिंदर कम उम्र से ही अच्छी कमाई कर रही है और मैं यकीन रखती हूँ कि जतिंदर अपनी मेहनत के कारण बहुत आगे बढ़ेगी। जो लोग हलातों का सामना करते हैं वे कभी नहीं गिरते और सफलता निश्चित रूप से एक दिन न एक दिन उनके पैर चूमती हैं। बेटियों पर यकीन करो, वह भी बाहर के देशो की तरह पंजाब में खूब विकास कर सकती हैं और कमा सकती हैं।

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6 अक्टूबर, 2020

हिदुस्तान में जाने माने स्कूल, कॉलेज एंव विशवविद्यालय है जिनमे भारतीय IIT (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) प्रथम स्थान पे आते हैं। पूरे भारत में कुल 23 IIT's (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रवेश करने के लिए बहुत ही कठिन परीक्षा होती हैं। जिनमें संयुक्त प्रवेश परीक्षा (Joint Entrance Examination) के दो पड़ाव होते हैं - जेईई मेन (JEE Main) और जेईई एडवांस (JEE Advance)।

हाल ही में हुए JEE Advance-2020 के नतीजे सामने आए जिसमें राज्य महाराष्ट्रा के शहर पुणे के निवासी 'चिराग फलोर' ने सबसे ज्यादा अंक प्राप्त करके शीर्ष स्थान हासिल किया हैं। चिराग फरोल बहुत ही उत्तम एंव होशियार विद्यार्थी हैं। पिछले साल 2019 में हुए 13 वें अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में 'चिराग फलोर' ने एस्ट्रोनॉमी में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का सर पूरे विश्व में ऊँचा किया था।

इसके अलावा मेरे राज्य पंजाब में जालंधर वासी 'उज्वल मेहता' ने JEE Advance-2020 में पूरे सूबे में प्रथम स्थान हासिल किया। 'उज्जवल' पिछले चार सालो से JEE की परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था और आज उसकी की हुई तैयारी का मकसद बहुत ही प्रशंसात्मक तरीके से पूर्ण हुआ।

JEE की परीक्षाओं में सफलता हासिल करना बहुत ही मुश्किल होता हैं परन्तु असंभव नहीं। किसी भी चीज़ को हासिल करना और सपनों को पूरा करने के लिए दिल में जनून और आत्मविश्वाश होना चाहिए। जिस तरह 'चिराग', 'उज्जवल' और अन्य 43,202 विद्यार्थीओ को उनकी कड़ी मेहनत के बल पर सफलता प्राप्त हुई। देश के उन सभी उज्जवल भविष्य को हार्दिक बधाई।

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30 सितंबर, 2020

दरिंदगी की कोई सीमा नहीं ख़ासकर मेरे देश में! आखिर कब बदलेगी हमारी सोच? कब मिलेगी वो सुरक्षित आज़ादी देश की महिलाओं को? अभी निर्भया, कठुआ, उन्नाओ और ऐसे अनगिनत बलात्कारों की आग सीने से बुझी नहीं होती और आये दिन एक ओर दिल दहला देने वाली ख़बर सुनने को मिल जाती है। दो हफ्तों पहले उत्तर प्रदेश के गांव हथरस में एक दलित परिवार की 19 साल की बेटी के साथ उच्च वर्ग के चार दरिंदो ने दुष्कर्म किया, उसे मारा पीटा गया, यहाँ तक की उसका गला दबाकर मारने की कोशिश भी की गई मगर गांव वालो को पता चलने पे उसे ज़िले के हस्पताल लिजाया गया। मगर हलात काबू से बाहर होने की वजह से मनीषा को दिल्ली के सफदरजंग हस्पताल में भर्ती कराया यहां पिछले कल उस बेगुनाह पीड़ित ने दम तोड़ दिया।

हमारे देश में नए नए कानून जरूर बनेगे, हर रोज़ बनेगे मगर महिलाओं की कड़ी सुरक्षा के लिए यहां ऐसा कुछ नहीं! यहां पर तो ऐसा हैं की जिसके साथ गलत हो उसे ही दर दर भटकना पड़ता है, कोर्ट के चक्र लगाने पड़ते हैं। ये कहाँ का न्याय हुआ? अभी कुछ दिन पहले सबने खूब बेटी दिवस मनाया। सबने खूब सोशल मीडिया पे बेटी दिवस की बधाई दी ! क्या फायदा उन शुभकाममनायो का जब हलात और हक़ीक़त ही कुछ और कहते हैं? कुछ दिन के लिए जस्टिस के हैशटैग होंगे और फिर सब इंतज़ार करेंगे होने वाले अगले बलात्कार का! क्यों भई? क्योकि हमारे समाज में कर्त्तव्य तो बस यही तक है। जनम लेने से पड़ने तक, पड़ने से नौकरी तक और नौकरी से फिर बहु बनने तक फिर माँ फिर सास बनने तक पूरी ज़िन्दगी संघर्षो भरी ही तो चलती हैं। इंसान थोड़ी हैं मनोरंजन का एक साधन हैं जब मन करे जैसे करे बस इस्तेमाल में आना चाहिए। जिस बच्ची को जन्म लेते ही मार देते हैं यह कहकर की ये लड़की हैं तो उन लोगो के लिए बलात्कार करके, मार पीट के, जला के फेंक देना कौन सा बड़ी बात हैं ! अनुरोध हैं उन समाज के ठेकेदारों से अगर नहीं कर सकते हिफाज़त इस समाज में दूसरी बेटियों - महिलाओं की तो सच में पैदा करके इस दुनिया में मत लाना इन मासूमो को और चेतवानी हैं उन दरिंदो को संभल जाओ , सुधर जाओ ! हम शांत है तो इसका मतलब ये नहीं की हममें आग नहीं डर तो ये है कही समुद्र कम न पड़ जाये इसे बुझाने को।

मुझे दिल से अफ़सोस है कि बहुत गलत हुआ मनीषा के साथ। उसकी आत्मा की शान्ति के लिए प्राथना करती हूँ और आशा करती हूँ की बहुत जल्द मनीषा के गुनहगारों को कड़ी सज़ा मिले और मनीषा को उसका इन्साफ मिले।

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22 जुलाई, 2020

जो जियें ही दूसरों के लिए पहले
वो क्या डरें मौत के खबरनामो से..
जिनको खरीद ना सके कोई दौलत से
वो क्या बिकेंगे हीरों की खानों से..
किसी बात को समझें ना ग़म हम
हमारी साँसें चलतीं हैं मुस्कुराने से
अगर इतना है, अहंकार मन में
ज़रा खरीद के दिखाओ,
प्यार बड़ी बड़ी दुकानों से...!

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30 जून, 2020

बहुत ही खूब गाना लिखा और गाया गया विक्रांत कपूर जी के दुवारा। Angels Paradise Pre School के अध्यक्ष श्री विक्रांत कपूर जी ने जिस प्रकार बेहतरीन लफ्ज़ो में गाने को लिखा उसी ही अंदाज़ में उन्होंने गाने को गाया भी। इस महामारी में डॉक्टर्स और पुलिस हमारे लिए फ़रिश्तो का रूप है परन्तु कही न कही देखा जाए तो अगर आज वो इस मुकाम पर है तो सिर्फ और सिर्फ शिक्षको की वजह से। मैं उन सब फ़रिश्तो का तह दिल दे शुक्रियादा करती हूँ और इन सब को आज ये मुकाम हासिल करने के पीछे रहे बहुत ही महान और विद्वान अध्यापको को दिल से सलाम भी करती हूँ। मैंने इस lockdown में ये भी देखा कि चाहे स्कूल बंद थे परन्तु अधियापको ने कड़ी मेहनत कर बच्चों को घर में शिक्षा प्रदान की जिससे कही न कही हमारे देश का भारी नुक्सान होते हुए बच गया।

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17 जून, 2020

लद्दाख के गैलवान में हमारी मातृभूमि की रक्षा करते हुए हमारे बहादुर सैनिकों को खोने का दर्द शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है। मैं अमर नायकों को सलाम करती हूँ जिन्होंने भारतीय क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया है। मैं प्राथना करती हूँ, भगवान् हमारे अमर जवानों के परिवारों को इस दुखद घड़ी में हिम्मत और दिलासा दे। मेरी संवेदना उन सभी परिवारों के साथ........ 🙏

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17 जून, 2020

लद्दाख के गैलवान में हमारी मातृभूमि की रक्षा करते हुए हमारे बहादुर सैनिकों को खोने का दर्द शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है। मैं अमर नायकों को सलाम करती हूँ जिन्होंने भारतीय क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया है। मैं प्राथना करती हूँ, भगवान् हमारे अमर जवानों के परिवारों को इस दुखद घड़ी में हिम्मत और दिलासा दे। मेरी संवेदना उन सभी परिवारों के साथ........ 🙏

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13 जून, 2020

मेरे मार्गदर्शकों में से एक और मित्र अवनीश कुमार सिंह जी की कहानी जरूर सुनिए और उनके मिशन में उनका साथ दीजिये -

कई बार जीवन मे कुछ पड़ाव ऐसे आते हैँ जब लगता हैँ कि आप बस टूटने वाले हो और जाने कहाँ कुछ अच्छे इंसान आते हैँ, आपकी ताकत बनते हैँ और आपकी जिंदगी बदल जाती हैँ | सही समय पर उनका निस्वार्थ साथ आपको को नकारात्मक सोच और निराश जीवन से बचा लेता है| सोचिये कि यही सहारा और विश्वास हर व्यक्ति को सही समय पर मिल जाये तो एक समृद्ध, सुदृढ़ और सभ्य समाज की कल्पना सत्य मे बदलते देर नहीं लगेगी | आज के कोरोना काल मे लाखो लोगों को किसी ना किसी तरह के सहारे की जरुरत है | आइये हम कोश्शि करें की समय पर हम उनके साथ खड़े हो ताकि उनमे से हर एक आगे चल कर प्रगति करे, नेगेटिविटी से बचा रहे और एक अच्छे समाज का निर्माण हो सके |
- मंदीप कौर सिद्धु

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10 जून, 2020

मत समझो हम मदद करने आते हैं , कहीं ना कहीं उदासी भुलाने के लिए आते हैं, ख़ुशी लेने आते हैं ! - मंदीप

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